कई लोग जानते हैं कि गुर्दे की कमजोरी (शेन शू) के लिए लियूवेइ डिहुआंग वान और तिल्ली की कमजोरी (पी शू) के लिए जियानपी वान का उपयोग किया जाता है। लेकिन जब तिल्ली और गुर्दे दोनों में कमजोरी (पी-शेन ली शू) हो, तो यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि कौन सी औषधि बेहतर प्रभावी है। आज, डॉ. लियू आपको तिल्ली और गुर्दे की कमजोरी को दूर करने में सहायक तीन पारंपरिक चीनी औषधियों से परिचित कराएंगे।
1. जियानपी यीशेन केलि (健脾益肾颗粒)
इस औषधि में डांगशेन (党参), बाइझू (白术), गोजी (枸杞), न्यूझेनज़ी (女贞子), तूसीज़ी (菟丝子), और बुगुज़ी (补骨脂) होते हैं। यह गुर्दों को पोषण और यिन को मजबूत करता है तथा तिल्ली को शक्ति और क्यूई (气) बढ़ाने में मदद करता है।
तिल्ली शरीर के पोषण और परिवहन (यूं हुआ 运化) की जिम्मेदारी संभालती है, जबकि गुर्दे पानी (शुई 水) को नियंत्रित करते हैं। तिल्ली की क्यूई कमजोर होने पर पानी के परिवहन में असंतुलन हो जाता है, जिससे शरीर में तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं। इस स्थिति में गुर्दों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, और गुर्दे की क्यूई कमजोर हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर कमजोर महसूस करता है, भूख नहीं लगती, पेट फूलना, दस्त (腹泻), कमर और घुटनों में दर्द, हाथ-पैर ठंडे रहना, पैरों में सूजन, और बार-बार पेशाब जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ऐसे में, जियानपी यीशेन केलि का उपयोग शरीर को संतुलित करने और तिल्ली व गुर्दों को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
2. गुइफू लिजोंग वान (桂附理中丸)
इस औषधि में रोगुई (肉桂), फूज़ी (附子), डांगशेन (党参), बाइझू (白术), पाओ जियांग (炮姜), और झी गानकाओ (炙甘草) होते हैं। इसका कार्य है शरीर को गर्म करना, ठंड को दूर करना, तिल्ली को मजबूत करना और गुर्दों को यांग ऊर्जा (阳) प्रदान करना।
जब तिल्ली की यांग ऊर्जा कमजोर होती है, तो शरीर में नमी (शी 湿) बढ़ जाती है, जिससे शरीर की क्यूई का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। यह समस्या पाचन क्रिया, पेट दर्द, पेट फूलना, कमर दर्द, पैर कमजोर होना, और बार-बार पेशाब जैसी समस्याओं का कारण बनती है। इस स्थिति में, गुइफू लिजोंग वान तिल्ली और गुर्दों की यांग ऊर्जा को संतुलित कर ठंड को खत्म करने में सहायक हो सकता है।
3. सिशेन वान (四神丸)
इस औषधि में बुगुज़ी (补骨脂), वुवेइज़ी (五味子), रोउ डौकोउ (肉豆蔻), दाजाओ (大枣), और शेंगजियांग (生姜) शामिल हैं। यह औषधि गुर्दों को गर्म करती है, तिल्ली को मजबूत बनाती है, और दस्त (止泻) रोकने में सहायक है।
गुर्दे को "आधारभूत जड़" और तिल्ली को "आधारभूत स्रोत" कहा जाता है। दोनों के बीच पारस्परिक पोषण का संबंध होता है। जब गुर्दों की यांग ऊर्जा कमजोर होती है, तो तिल्ली की यांग ऊर्जा भी प्रभावित होती है। इससे भूख की कमी, बार-बार पेशाब, भोर के दस्त (वू गेंग शिए 五更泄), और चेहरे पर पीला रंग दिखाई देने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में, सिशेन वान का उपयोग गुर्दे और तिल्ली की ऊर्जा को संतुलित करने और दस्त को रोकने में किया जा सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें:
यदि तिल्ली और गुर्दे दोनों में कमजोरी के लक्षण दिखाई दें, तो उपरोक्त तीन औषधियों का संदर्भ लेकर उपचार किया जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति अलग होती है, इसलिए दवा का चयन चिकित्सक की सलाह के अनुसार और पारंपरिक चीनी चिकित्सा के सिद्धांतों के आधार पर किया जाना चाहिए।